Paddy News : देश के कई हिस्सों में इस बार मानसून की रफ्तार उम्मीद के मुताबिक नहीं रही। कहीं बारिश कम हुई तो कहीं लंबे अंतराल के बाद हल्की फुहारें ही देखने को मिलीं। ऐसे में धान की खेती करने वाले किसानों की चिंता लगातार बढ़ रही है। खेतों में पर्याप्त नमी नहीं होने से पौधों की बढ़वार प्रभावित हो रही है और कई जगह रोपाई का काम भी पीछे चल रहा है।
धान की फसल पर क्यों बढ़ रहा है खतरा?
धान ऐसी फसल है जिसे शुरुआती दिनों में पर्याप्त नमी और पानी की जरूरत होती है। यदि समय पर बारिश नहीं होती, तो पौधों की जड़ें कमजोर पड़ने लगती हैं। इसका असर आगे चलकर कल्ले बनने, पौधों की ऊंचाई और अंत में पैदावार पर भी दिखाई देता है।
किसानों को अब क्या करना चाहिए?
अगर आपके क्षेत्र में बारिश नहीं हो रही है, तो सबसे पहले खेत में उपलब्ध नमी को बचाने की कोशिश करें। जिन किसानों के पास सिंचाई की सुविधा है, उन्हें जरूरत के अनुसार हल्की सिंचाई करनी चाहिए। खेत में लंबे समय तक पानी भरकर रखने के बजाय आवश्यकता के अनुसार पानी देना अधिक फायदेमंद हो सकता है।
क्या सिर्फ बारिश का इंतजार करना सही होगा?
यही सबसे बड़ा सवाल है। अगर अगले कुछ दिनों तक बारिश नहीं होती, तो केवल आसमान की ओर देखना नुकसान बढ़ा सकता है। जिन किसानों के पास ट्यूबवेल, बोरवेल या अन्य सिंचाई के साधन हैं, उन्हें समय रहते उनका उपयोग करना चाहिए।
खाद डालने में न करें जल्दबाजी
कई किसान बारिश की उम्मीद में पहले ही यूरिया डाल देते हैं। लेकिन अगर खेत में पर्याप्त नमी नहीं है, तो इसका पूरा लाभ फसल को नहीं मिल पाता। ऐसी स्थिति में खाद का उपयोग तभी करें जब मिट्टी में पर्याप्त नमी हो या सिंचाई की व्यवस्था कर ली गई हो।
खरपतवार पर रखें नजर
बारिश कम होने पर कई प्रकार के खरपतवार तेजी से बढ़ने लगते हैं। ये फसल के साथ पानी और पोषक तत्वों के लिए प्रतिस्पर्धा करते हैं। इसलिए समय-समय पर खेत का निरीक्षण करें और जरूरत पड़ने पर खरपतवार नियंत्रण करें।
क्या आपकी फसल तनाव के संकेत दे रही है?
अगर धान के पौधों की पत्तियां मुड़ने लगी हैं, रंग हल्का पड़ रहा है या बढ़वार रुक गई है, तो इसे नजरअंदाज न करें। ये नमी की कमी या पोषण संबंधी तनाव के शुरुआती संकेत हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में कृषि विशेषज्ञ की सलाह लेकर सिंचाई और पोषण प्रबंधन की योजना बनाना बेहतर रहेगा।
मौसम की जानकारी पर रखें नजर
आज मोबाइल पर मौसम की जानकारी आसानी से उपलब्ध है। अगले कुछ दिनों के पूर्वानुमान के आधार पर सिंचाई, खाद और अन्य कृषि कार्यों की योजना बनाएं। इससे लागत भी कम होगी और संसाधनों का बेहतर उपयोग किया जा सकेगा।
घबराने की नहीं, समझदारी से काम लेने की जरूरत
मानसून की बेरुखी निश्चित रूप से किसानों के लिए चिंता का विषय है, लेकिन सही समय पर उठाए गए कदम नुकसान को काफी हद तक कम कर सकते हैं। खेत में नमी बनाए रखना, जरूरत पड़ने पर सिंचाई करना, संतुलित उर्वरक देना और मौसम के अनुसार फैसले लेना इस समय सबसे महत्वपूर्ण है।